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जरूर करिएगा दोस्तों वैसे तो प्रत्येक मास की पूर्णिमा तिथि को धन पायो और शुभ माना जाता है लेकिन साल की कुछ खास

परिस्थितियों को सबसे शुभ और समृद्धि शाली माना जाता है इन्हीं में से एक है शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद

पूर्णिमा कहा जाता है यह पूर्णिमा तिथि के अनुसार साल 2022 में पूर्णिमा तिथि 9 अक्टूबर के दिन पड़ेगी को होगा और चंद्रमा पूर्ण

कलाओं से युक्त होगा इसलिए इस दिन चंद्रमा को खीर का भोग लगाएं इससे शरद ऋतु का आगमन होता है शरद पूर्णिमा वर्षा ऋतु

और शीत ऋतु के संधिकाल में पढ़ती है इसलिए इस दिन का धार्मिक के साथ-साथ चिकित्सकीय महत्व है आयुर्वेद में शरद पूर्णिमा

की रात में चंद्रमा की रोशनी को अमृत के समान बताए गए हैं लंकाधिपति रावण शरद पूर्णिमा के चरणों को दर्पण के माध्यम से

ग्रहण करते थे इससे उन्हें पूर्ण शक्ति प्राप्त होती थी इस रात्रि 10:00 बजे से रात्रि 12:00 बजे के बीच कम वस्त्रों में घूमने वाले व्यक्ति

को ऊर्जा प्राप्त होती है नक्षत्र और अश्विन के कारण शरद से ऊर्जा का संग्रह होता है और बसंत विग्रह होता है शरद पूर्णिमा की रात्रि

में अपनी पूर्ण कला में होता है और वर्षा ऋतु के बाद आसमान भी सबसे स्वच्छ अवस्था में होता है पृथ्वी पर चारों और चंद्रमा की

होती है जैसे दूधिया रोशनी में नहा रही हो ऐसा प्रतीत होता है माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत की बरसात

होती है इसलिए शरद पूर्णिमा की रात्रि में चांद की रोशनी में रखने की और अगले दिन सुबह इसे ग्रहण करने की परंपरा प्रचलित है रात भर रोशनी में खेलने से होती है इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क है कि दूध में होता है जोकि चंद्रमा की किरणों से रोना शक्ति अर्जित

करता है चावल के मिश्रण से यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है इस खेल को खाने से दमा रोग और श्वसन रोगों में विशेष लाभ मिलता है शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा का विधान है इस दिन मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने से धन संपन्नता में

वृद्धि होती है शरद पूर्णिमा पर खीर का भोग लगाकर गरीबों में बांटना चाहिए ऐसा करने से घर से ले दुख और दर्द दूर हो जाता है चंद्रमा को खीर का भोग लगाकर कुंडली में चंद्र दोष दूर हो जाता है शरद पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी है क्योंकि मां लक्ष्मी करती है

और इनके पूजन से घर में धन संपदा का आगमन होता है समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के अनुसार मां लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी इसलिए इनको माता लक्ष्मी के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है और इससे अध्यक्ष शुभ माना जाता है मान्यता है कि

भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था इसी कारण से इसे कुमार पूर्णिमा भी कहा जाता है शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए जो पूजा उपाय किए जाते हैं अति शीघ्र ही शुभ फल प्रदान करते हैं आज

के इस वीडियो में हम आपको पूर्णिमा के शुभ संयोग पर किए जाने वाले कुछ बहुत ही आसान और प्रभावशाली उपाय बताने जा रहे हैं तो इस वीडियो को आखिर तक जरूर देखें आगे बढ़ने से पहले आपसे रिक्वेस्ट करते हैं कि वीडियो को लाइक जरूर करिएगा

दोस्तों को शेयर कर दीजिएगा और अगर आपने अभी तक चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो चैनल को सब्सक्राइब करके शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी का दिन माना जाता है इस रात्रि जागरण और मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है

शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी को गुलाबी रंग के फूल और जरूर चढ़ाना चाहिए ऐसा करने से मां लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती है पूर्णिमा का दिन चावल का दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है इससे चंद्र ग्रह से संबंधित दोष दूर हो जाते हैं इस दिन पितरों का

आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह उपाय जरूर करें एक लोटे में शुद्ध जल में जल में थोड़ी-सी चीनी और थोड़े से काले तिल डालने अब इस जल को आप दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके चढ़ा दे जल चढ़ाते समय ओम गुरुदेव नमः इस मंत्र का जाप करते रहे जल

चढ़ाने के बाद आंखें बंद कर दी इस बार ओम पित्र देव नमः का जाप करें दक्षिण दिशा पितरों की दिशा मानी जाती है पूर्णिमा के दिन इस तरह जल चढ़ाने से पित्र देव प्रसन्न हो जाते हैं इसके बाद पित्र देव को प्रणाम करें जाने अनजाने में हुई गलतियों की क्षमा मांगी

इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और पित्र दोष से मुक्ति मिलती है शरद पूर्णिमा को कार्तिकेय भगवान की पूजा से कुंवारी लड़कियों को योग्य वर की प्राप्ति होती है

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