जानिए क्यों हैं महाकाली का रंग काला !

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक बार फिर से दोस्तों अगर आप अपनी लाइफ में कुछ नया सीखना चाहते हैं तो चैनल

को सब्सक्राइब जरूर करिएगा आखिर क्यों काले रंग की है मां काली क्या वजह थी जिसके कारण मां काली को जन्म लेना पड़ा क्या

होता है जवाब मां से किया वादा पूरा नहीं करते जानने के लिए इस वीडियो को आखिरी तक जरूर देखें और कमेंट बॉक्स में लिखें

जय मां काली मां काली सदैव आपकी रक्षा करें दोस्तों हिंदू धर्म में मां काली का बड़ा महत्व है काली का समय और कार मान्यता है

कि उनकी उत्पत्ति समय और काल से पापियों के नाश के लिए हुई थी समय और काल से कोई भी नहीं बच सकता यह सभी को

निकल जाते हैं देवी का सातवां स्वरूप मां कालरात्रि है मां कालरात्रि का रंग काला है यह त्रिनेत्र धारी है मां कालरात्रि के गले में

कड़कती बिजली की अद्भुत वाला है उनके हाथों में और कांटा है उनका वाहन का है मां कालरात्रि को शुभंकरी भी कहते हैं मां दुर्गा

का विकराल रूप है मां काली दुष्टों का संहार करने हेतु मां ने यह रूप धरा मां के इस रूप को धारण करने के पीछे कई कथाएं

प्रचलित हैं और मार्कंडेय पुराण में उनका उल्लेख मिलता है क्या है मां के इस भयंकर रूप के पीछे की कथा जान ले इस वीडियो में

दोस्तों मां काली दिखने में जितनी बाबा लगती है उतनी ही भक्तों पर जल्दी हो जाती है माना जाता है कि जो पूरी श्रद्धा से पूजा करते

हैं उन पर शीघ्र हो जाती है उनकी रक्षा करती है और सभी प्रकार के मनोरथ पूर्ण करती है जिस प्रकार से हम अन्य देवी-देवताओं

का पूजन करते हैं ठीक उसी प्रकार से उनका पूजन करें मां काली को लाल रंग के फूल और काले रंग के वस्त्र अत्यंत प्रिय है मां

काली का सामान्य पूजन तो हर कोई कर सकता है परंतु उनके तंत्र पूजा का बहुत बड़ा महत्व है लेकिन मान्यता है कि तंत्र पूजा बिना गुरु के संरक्षण के कभी नहीं करनी चाहिए वरना इससे हानि भी हो सकती है मां काली का विशेष पूजन मध्य रात्रि में होता है लिंग

पुराण की कथा के अनुसार एक बार दारू के असूल ब्रह्मा को प्रसन्न किया ब्रह्मा द्वारा दिए गए वरदान से और ब्राह्मणों को प्रलय की अग्नि के समान दुख देने लगा उसने सभी धार्मिक अनुष्ठान बंद करा दिए स्वर्ग लोक में अपना राज्य स्थापित कर दिया इससे चिंतित

होकर सभी देवता ब्रह्मा और विष्णु के धाम पहुंचे ब्रह्मा जी ने बताया कि यह दोष केवल स्त्री द्वारा ही माना जाएगा तब ब्रह्मा विष्णु सहित सभी देवी रूप धरकर दूसरा रूप से लड़ने के अध्यक्ष था उसने उन सभी को परास्त कर दिया तो फिर ब्रह्मा विष्णु समय सभी

दे भगवान शिव के धाम कैलाश पर्वत पहुंचे तथा उन्हें दारू के विषय में बताया भगवान शिव ने उनकी ओर देखा और कहा है कल्याणी जगत के हित के लिए और दारू के लिए तुम से प्रार्थना करता हूं यह सुनकर मां पार्वती मुस्काई और अपने को भगवान

शिव में प्रवेश करवा दिया मां भगवती का यह भगवान शिव के शरीर में प्रवेश कर उनके कंठ में धारण करने लगा इसके प्रभाव से वह का निर्गुण में परिवर्तित हुआ भगवान शिव ने उसको अपने भीतर महसूस करके अपना तीसरा नेत्र खोला उनके द्वारा काली मां काली मां काली के ललाट में तीसरा नेत्र और रेखा की कथा और हाथ में त्रिशूल और नाना प्रकार के आभूषण तथा वस्तुओं से

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